किसी का मजदूरी करु तो ओ गुलामी थोड़ी ना है अगर हम किसी का हक मार दे तो ओ ईमानदारी थोड़ी ना है ये लम्हे है एक दिन न एक दिन गुजर जाएंगे एक से बढ़ कर एक आएंगे तेरे जैसे तो अनेक आएंगे
✍️ध्रुव श्रीवास्तव✍️
पागलपन और प्रतिभा के बीच की दुरी सफलता से ही मापी जाती है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें