उनकी गली से गुजरा तो कुछ आवाज आइ हमे भी उनकी याद आई सोचा की उनसे  कुछ बोलू फिर याद आइ की लब्ज की बात लब्ज पे ही रहने दो तभी मुझे अपनी औकात याद आइ  
                    ✍️ध्रुव श्रीवास्तव✍️

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