शीशा कितना भी मजबूत हो एक चोट पे टूट ही जाता है रिस्ता कितना भी मजबूत हो एक नोक झोक पे रुठ ही जाता है 
                 ✍️ध्रुव श्रीवास्तव✍️

  

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