मुसाफिर बन के जीयो गे तो तन्हा तन्हा सा लगता है मुसाफिर होने का गम अब तो हमे सताने लगा है अपनो की याद अब आने लगा 
                     ✍️ध्रुव श्रीवास्तव✍️

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