जो बे इन्तिहा मोहब्बत थी कभी तुमसे अब उसको बेकार लिखूंगा तुमसे ये उम्मीद ना थी मुझे तो इसलिए बेवफा बार बार लिखूंगा 
                    ✍️ध्रुव श्रीवास्तव✍️

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